कितना प्यारा जग से न्यारा मेरी मैया का दरबार है मैने देखा है
उन्हे उँचे पर्वत मोहक
कल कल करती नदिया
ढूंड में दिखता मंदिर
आँख मिचोली करता है
मैने देखा है
कितना प्यारा जग से न्यारा
जगसे न्यारा सबसे प्यारा
मेरी मैया का दरबार है
मैने देखा है
इसके दर बिगड़ी बन जाती
पल भर में झोली भर जाती
श्रद्धा से जो दर पे जाता
आन बान सम्मान दिलाती
माँ सबको करे निहाल
मैने देखा है
दुर्गम पर्वत कठिन चढ़ाई
बाह पकड़ ले जाती माई
बैठी मात गुफा के अंदर
चरणं गंगा धार लहराई
माँ का हरदे बड़ा विशाल
मैने देखा है
क्या गर्मी सर्दी बरसात
बिना रुके सब चड़ते जाते
जीत के संग शक्ति को पाते
देती दर्शन बारम बार
मैने देखा है
कितना प्यारा जाग से न्यारा
जगसे न्यारा सबसे प्यारा
मेरी मैया का दरबार है
मैने देखा है
