केसर की महक लुटाएंगे ये केसर सा मुस्कायेंगे
केसर की महक लुटाएंगे
ये केसर सा मुस्कायेंगे
केसरिया केसरी नंदन है केसरिया चन्दन है
अध्भुत है इनकी लीला हर काम इनका हठीला है
देखा जो सूरज सजीला फल जान सहज ही लीला है।।
सूरज तबसे घबराया है खेले कभी निकट नहीं आया है
नित करता तेरा अभीनंदन केसरिया महकता चन्दन है।।
मंगल है तेरी माया तू मंगल मुखी कहाया है
जिस मंगल को तू आया है मंगल वार कहाया है।।
मंगल को मांगलिक बंधन है
केसरिया महकता चन्दन है।।

