कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा
जिसका हर एक मोटी है पारस के जैसा
कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा।।
जिसका हर एक मोटी है पारस के जैसा
कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा।।
जिसके हर शब्दों से वरदान झलकता है
जो पाठ करे दिल से भाव पार उतरता है।।
इसको अपनाने में अब संशय है कैसा
कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा।।
हनुमान की महिमा का गुणगान भरा इसमे
बजरंग रिझाने का समान भरा इसमे।।
ये महामंत्र प्यारे अमृत के रस जैसा
कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा।।
इससे कंठ बसा करके उच्चारण करते है
हर शब्द तो बाबा के चरनो से लिपटे है।।
श्री के हर कन कन में विश्वाश भरे ऐसे
कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा।।
जिसका हर एक मोटी है पारस के जैसा
कंचन सा बना देती हनुमान की चालीसा।।
