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कैसे भूलूंगी करम तेरा माँ

  • Kaise Bhulungi Karam Tera Maa

कैसे भूलूंगी करम तेरा माँ, तूने धरती से फलक पर मुझे बिठाया है,
अब मुझे चिंता नहीं है कोई, मेरे संग हर घड़ी हीं मइया तेरा साया है,
कैसे भूलूंगी करम तेरा माँ, तूने धरती से फलक पर मुझे बिठाया है,
कैसे भूँलूँगी !

बेदर्दी था सारा जहां, कोई नहीं था मेरा यहाँ,

हो बेदर्दी था सारा जहां, कोई नहीं था मेरा यहाँ,
ऐसे में पकड़ी थी बांह, तूने माँ मेरी,
कैसे मैं तेरी, इस बात को बात को भूल सकुंगी,
तुझसे पहले मुझे सभी ने माँ, एक खिलौने की तरह से बड़ा नचाया है,
कैसे भूलूंगी करम तेरा माँ, तूने धरती से फलक पर मुझे बिठाया है,
कैसे भूँलूँगी !

तुमने बड़ा उपकार किया, मुझको अपना प्यार दिया,

हो तुमने बड़ा उपकार किया, मुझको अपना प्यार दिया,
जीवन मेरा संवार दिया,
वर्ना तो माँ इस दुनिया की, भीड़ में गुम हो जाती,
तेरे रहमों करम से इस जग में, मैंने खोया हुआ अपना मुकाम पाया है,
कैसे भूलूंगी करम तेरा माँ, तूने धरती से फलक पर मुझे बिठाया है,
कैसे भूँलूँगी !

और इस भजन को भी देखें : जैसे तू रखे वैसे रह लेंगे माँ

जबतक तन में सांस चले, जीवन की ये बगिया खिले,

हो जबतक तन में सांस चले, जीवन की ये बगिया खिले,
मुझको तेरा दरबार मिले,
बस इतना मेरा अरमान है माँ, कुछ और ना तुमसे चाहूँ,
तेरे चरणों में बीते ये जीवन, तुझसे शर्मा ने सिर्फ मइया इतना चाहा है,
कैसे भूलूंगी करम तेरा माँ, तूने धरती से फलक पर मुझे बिठाया है,
कैसे भूँलूँगी !


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