झंडे वाली ने मेहर बरसाई उलंबे सारे दूर हो गये
झंडे वाली ने मेहर बरसाई
उलंबे सारे दूर हो गये
मा ने खुशिया दी मौज लाई
उलम्बे सारे दूर हो गये।।
पूरा कित्ता झंडे वाली ने हर सवाल
भर दित्ती झोली सद्दी सुक्खा नाल
गाल बिगड़ी है माँ ने बनाई
उलंबे सारे दूर हो गये।।
झंडे नाल सद्दे रहती दिन रैन आए
हर के बेचैन दित्ता सुख चैन आए।।
याद दुखा दी दिल विच भुलाए
उलंबे सारे दूर हो गये।।
झंडे वाली दी सागर मेहर ऐसी होई है
मन विच रहा ना शिकवा ना कोई आए
दात मन चाही मैया कोलो पाई
उलंबे सारे दूर हो गये।।

