जय जय महावीर हनुमान

  • Jai Jai Mahaveer Hanuman

जय जय महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान।।

जय जय बुद्धि तेज निधन
करते सारे तब गुणगान।।

जय जय महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान।।

अंगद से दर दर कपि राजा
छुप छुप जीने लगा
मैत्री तुम प्रभु से करवाए
भय तब उसमे जगा।।

संग सकार रघुवर को पाकर
मन प्रभुवर में अनुरागा
साथ राम के वानर सेना
नया सवेरा जगा।।

संकट मोचक नाम जगत में
हनुमत तुमने पाया।।

भक्ति दीजिए मुझको
शरण तुम्हारी आया

जय जय महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान।।

राम दुखी थे सिया विरह में
पल पल लगता भारी।।

सिया दुखी थी बिना राम के
तुम ही संक्त हारी

खोजा सीता को तुमने ही
तुमने ही लंका जलाई

आती प्रसन्ना तब हुए रामजी
सभी मुख छाई

संकट मोचन नाम जगत में
हनुमत तुमने पाया
भक्ति दीजिए मुझको अपनी
शरण तुम्हारी आया
जाई जाई महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान

शक्ति बान जब लगा लखन को
मुरछछा उनको आई
हुए उदास राम की सेना
व्याकुल आती अकुलाई

लाए वैधया तुम्ही लंका से
तुम पर्वत से बूटी

चेट नही लक्ष्मण को आया
घोर निराशा छूटी

संकट मोचन नाम जगत में
हनुमत तुमने पाया
भक्ति दीजिए मुझको अपनी
शरण तुम्हारी आया
जाई जाई महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान

राम लखन को हरा
अहिरवाँ जब पटल गया था।।

छुड़ा वाहा तुमने दोनो को
अद्भुत काम किया था
मार दुष्ट को राज धर्मा का
तुमने वाहा जमाया।।

अनुज सहित रघुवर को पाकर
कपि दल सब हरषाया।।

संकट मोचन नाम जगत में
हनुमत तुमने पाया
भक्ति दीजिए मुझको अपनी
शरण तुम्हारी आया
जय जय महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान।।

संकट विकट कौनसा ऐसा
तुमने पार ना पाया
नाम तुम्हारा जो भी लेता
संकट कभी ना छाया।।

संकट डोर किया देव का
मैं छोटी सी काया
निकट ना संकट आए मेरे
भजन तुम्हारा गया।।

संकट मोचन नाम जगत में
हनुमत तुमने पाया
भक्ति दीजिए मुझको अपनी
शरण तुम्हारी आया
जय जय महावीर हनुमान
संकट मोचक भक्त महान।।

मिलते-जुलते भजन...