जय बजरंगी जय हनुमाना तुम को प्रभु जी जग ने माना
जय बजरंगी जय हनुमाना,
तुम को प्रभु जी जग ने माना,
जय बजरंगी जय हनुमाना।।
राम प्रभु की मुर्दिका लेकर
मिले सीता को लंका में दे कर,
हाल सुनाया मन भर आया,
माँ सीता के चरणों को छू कर,
पूजे तुम्हको सारा ज़माना,
जय बजरंगी जय हनुमाना।।
लक्षण जी को मूर्छा ने घेरा,
रात बहुत थी दूर था सवेरा,
संजीवनी तुम लेकर आये
मूर्छा टूटी चमका चेहरा,
मन मंदिर में आके समाना,
जय बजरंगी जय हनुमाना।।
सीता मुक्ति का प्रण लिया था,
रावण ने जब एहम किया था,
तुमने लंका दहन किया था,
विभीषण को वरदान दिन था,
तब वो तुम्हारी शक्ति को जाना,
जय बजरंगी जय हनुमाना।।
