होली में मेरे लग जाएगी रे होली
ओ लजीले सकूचीले रस सीले सुर्मिले से
काटीले ओ कूटेले चटकीले मटकीले है
रूप के लूभिले कजरिले उन्मिले पेर
बरचीले तिरच्छिले फसिले और गशीले है
ललित किशोरी झाँकीले डाब रीले मानो
आती रसीले चमकीले और रंगीले है
हो छबीले छकीले और नीले से नशीले
नैन नंद लाल के नसीले और नुकीले है
होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
आँखियाँ की चोट
होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट
अब की चोट बचाए गयी हू
मैं बचाए गयी हू
कर घूँघट की औट ओ रसिया
होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
मैं बेटी वृिषुभन बाबा की
हो वृिषुभानु बाबा की
और तुम हो नंद के डॉट
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
मत मारे दृगन की चोट
हो मत मारे दृगन की चोट
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
मोहे तो लाज भरे घ्हर्खुल की
और तुम में बड़े बड़े खोट
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
मत मारे दृगन की चोट
हो मत मारे दृगन की चोट
नंद किशोर वही जाए खेलो
जहा तुम्हारी जोत
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया
मत मारे दृगन की चोट
हो मत मारे दृगन की चोट
ओ रसिया होली में मेरे लग जाएगी रे
मत मारे दृगन की चोट ओ रसिया

