हे मेरे श्याम तेरे कारण साँवरिया बदनाम हो गए हम
हे मेरे श्याम कारण तेरे साँवरिया, बदनाम हो गए हम,
बृज की गली गली में, सरेआम हो गए हम।
कानो में गूंजे हर दम, तेरी ही मीठी बातें,
कटती नहीं कन्हैयाँ तन्हाई की रातें,
समझाऊँ कैसे दिल को नाकाम हो गए है,
बृज की गली गली में, सरेआम हो गए हम।
जबसे गए हो छलिया घुट घुट के जी रहे हैं,
तेरे बिरहा विष को हंस हँस के पी रहे हैं,
रोने पे हँसने वाले हर तमाम हो गए हैं,
बृज की गली गली में, सरेआम हो गए हम।
नींदो में सोने वाले झलकी दिखा जा तेरी,
आके जारा देख ले हालत क्या है रे मेरी,
बर्बाद तेरे पीछे मेरे श्याम हो गए है,
बृज की गली गली में, सरेआम हो गए हम।

