हे गौरी सूत मंगल मूर्ति
हे गौरी सूत मंगल मूरत, कृपा बनाये रखना-०२
जहाँ अकेली हो जाऊं,
जहाँ अकेली हो जाऊं, मेरी ऊँगली थाम के चलना,
हे गौरी सूत मंगल मूरत, कृपा बनाये रखना-०२
जब-जब घिरती दुविधाओं में, याद है आती छवि सिन्दूरी,
तुम ना होते जो सिद्धि विनायक, हर आशा रह जाती अधूरी,
शीश मुकुट गले मोतियन माला, तारों सी आँखे करती उजाला,
हे गौरी सूत मंगल मूरत, कृपा बनाये रखना-०२
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समय का सूरज आंख दिखाए, दुनिया धुप है तुम हो छाया,
दर से तुम्हारी खाली ना लौटा, सच्चे मन से जो भी आया,
हर भटके को दिया सहारा, हर डूबे को तुमने उबारा,
हे गौरी सूत मंगल मूरत, कृपा बनाये रखना-०२
जहाँ अकेली हो जाऊं,
जहाँ अकेली हो जाऊं, मेरी ऊँगली थाम के चलना,
हे गौरी सूत मंगल मूरत, कृपा बनाये रखना-०२
