हे सुख में राम रटले हनुमान रटले

  • He Sukh Me Ram Ratle Hanuman Ratle

चार दिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रटले हनुमान रटले ।।

चार दिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रटले हनुमान रटले ।।

या टन माटी की सी गुड़िया पल का ना अएतबार
बाबा का दरबार लगले आए मंगलवार
ओ भक्ता दूर हटले हनुमान रटले।।

चार डिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रटले हनुमान रटले ।।

यो टन चरखे के सा चलता
कटे सास की पूनी
थोड़ी से तेरी कटनी रह गयी
कितते जाली दूरी
भजन पे भजन पे भजन पे
भजन पे ठीक डतले हनुमान रटले।।

चार दिन की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रटले हनुमान रटले।।

जो टन डीवे के सा जलता
स्वास तेल सा गलगे
धर्मा कामना सीखले बेब भक्ता
सत्संग कीर्तन छलके
नही ते नही ते तेल घटले हनुमान रत्ले
नही ते तेल घटले हनुमान रत्ले

चार डिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रत्ले हनुमान रत्ले

यो तन पानी के सा बुलबुला बाद चलते फुट
और काम ते छ्चोड़ सके पेर
हरी भजन ना छ्छूओते
भरम का बदल छटे हनुमान रटले
भरम का बदल छटे हनुमान रटले।।

चार डिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रत्ले हनुमान रटले।।

यो टन फूल कमाल सा खिल रहा
धूप चड़े मुरझावे
चोखी भक्ति करले बहना
काम तेरे यो आआवे
फिर तेरा फिर तेरा पूरा पतले हनुमान रटले
फिर तेरा पूरा पतले हनुमान रटले।।

चार डिना की चाँदनी है फिर अंधेरी रात
हे सुख में हे सुख में
हे सुख में राम रटले हनुमान रटले ।।

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