हनुमानजी पहुच गये लंका
हनुमानजी पहुच गये लंका
राम नाम का बजा दिया डंका
अब दिल में रही ना कोई शंका।।
हनुमानजी पहुच गये लंका
राम नाम का बजा दिया डंका।।
लंका पति जो ले गया
सिया चुरा के एक दिन।।
धीर वीर रघुवीर भी
व्याकुल हुए सिया के बिन।।
जब कुछ भी समझ नही आया
श्री रामजी ने तुमको पठाया।।
हनुमान जी पहुच गये लंका
राम नाम का बजा दिया डंका
बैठी थी मैया जानकी
जाके चरण पखारे
हाथो में देके मुद्रिका
मीठे वचन उच्चारे ।।
हनुमान हू मैं तेरा बालक
श्री रामजी का हू मैं सेवक।।
हनुमानजी पहुच गये लंका
राम नाम का बजा दिया डंका।।
अक्षय को तूने मारके
पापी का बाल घटाया
सोने की लंका दुष्ट की
पल में उससे जलाया।।
श्री राम ही राम पुकारे
लंका में वो पवन दुलारे।।
हनुमंजी पहुच गये लंका
राम नाम का बजा दिया डंका।।
जो था दीवाना राम का
उसको ही तुमने छोड़ा
बाकी बिसारिया आप ने
सबको ही तोड़ा फोड़ा।।
वीरो के वीर महावीरा
मान कोमल वज्रा शरीरा।।
हनुमानजी पहुच गये लंका
राम नाम का बजा दिया डंका।।
