हनुमान मेरा नाम है मैं अंजनी का लाल हू
हल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू
हनुमान मेरा नाम है
मैं अंजनी का लाल हू।।
हाल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू।।
हनुमान मेरा नाम है
मैं अंजनी का लाल हू।।
आदेश कीजिए मैं
रुख़ लहरो का मोड़ दू।।
लंका में जाके
रावण की गर्दन मरोड़ दू।।
मुझे मौत का नही है दर
कालो का काल हू।।
हल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू।।
पल में हज़ारो कोष का
रास्ता में नपता ।।
यमराज मेरी दहशत से
तर तर है कपता।।
आकाश छुलु एक क्षण में
वो मैं उच्छल हू।।
हाल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू।।
जालिम हो मौत कितनी भी
इससे कुछ ना करने दू।।
भैया लखन को मैं प्रभु
हरगिज़ ना मरने दू।।
देखेगी सारी ये दुनिया
वो मैं कमाल हू।।
हाल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू।।
मन की गति से उडद चले
सबको पछाड़ के।।
बूटी थी जिसपे वो पर्वत
लाए उखाड़ के।।
छ्छूते नही उससे संकट
जिसकी मैं ढाल हू
हल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू।।
हनुमान मेरा नाम है
मैं अंजनी का लाल हू।।
हल कर सका नही कोई
ऐसा सवाल हू।।
हनुमान मेरा नाम है
मैं अंजनी का लाल हू।।
