है प्रीत जहाँ की रीत सदा

  • hai preet jahan ki reet sada

जब जीरो दिया मेरे भारत ने, भारत ने मेरे भारत ने,
दुनिया को तब गिनती आई।
तारों की भाषा भारत ने, दुनिया को पहले सिखलाई।
देता न दशमलव भारत तो, यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था ।
धरती और चाँद की दूरी का अंदाजा लगाना मुश्किल था ॥
सभ्यता जहाँ पहले आई, पहले जन्मी हैं जहाँ पे कला ।
अपना भारत वो भारत है, जिस के पीछे संसार चला ।
संसार चला और आगे बड़ा, यूँ आगे बड़ा, बढता ही गया,
भगवान् करे यह और बड़े, बढता ही रहे और फूले फले ॥

है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूँ ।
भारत का रहना हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ ॥

काले गोरे का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है ।
कुछ और ना आता हो हमको हमें प्यार निभाना आता है ।
जिसे मान चुकी सारी दुनिया मैं बात वोही दोहराता हूँ ॥

जीते हो किसी ने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता है ।
जहाँ राम अभी तक है नर में, नारी में अभी तक सीता है ।
इतने पावन हैं लोग जहाँ, मैं नित नित शीश झुकाता हूँ ॥

इतनी ममता नदियों को भी जहाँ माता कह के बुलाते हैं ।
इतना आदर इंसान तो क्या पत्थर भी पूजे जातें है ।
उस धरती पे मैंने जनम लिया, यह सोच के मैं इतराता हूँ ॥

https://youtu.be/_LwvxQxkFAQ?list=RD_LwvxQxkFAQ

मिलते-जुलते भजन...