दूजा नहीं है आपसा बलियो में हे बाली
दूजा नहीं है आपसा
बलियो में हे बाली
पर्वत उठा के उड़ चले
बूटी जो ना मिली।।
दूजा नहीं है आपसा
बलियो में हे बाली
पर्वत उठा के उड़ चले
बूटी जो ना मिली
सूरज के साथ ही आप ही
खेल को जब गए
सुंदर खिलोना जान कर
मुख में निगल गए
देवो ने विनती की तबी
मुक्ति उसे मिली
दूजा नहीं है आपा
बलियो में हे बाली।।
मारी जो एक छलांग तो
सिंधु को लाएंगे आप
ब्रह्मा के ब्रह्म पास में
खुद को बांधे आप
रावण की लंका रख की
धू धू के वो जाली
जल्मे हरि के नाम के
पत्थर तैरा दिए
रघुवरजी तुम्हारे हर्ष के
संकट मिटा दिए
चरणों में तेरे राम के
मुझको जगह मिली
दूजा नहीं है आपा
बलियो में हे बाली।।

