चलअ करे तुलसी जी के पुजनवा
तुलसी माँ जय जय तुलसी माँ
तुलसी माँ जय जय तुलसी माँ
जय हो !
जय हो !
डुबअ ता किरिनिया भइले सांझ के पहरिया,
हाथ गोड़ धोलअ, लेलअ घीव के दीयरिया,
ये सखी,
डुबअ ता किरिनिया भइले सांझ के पहरिया,
हाथ गोड़ धोलअ, लेलअ घीव के दीयरिया,
तोहर पूरा होइ सब अरमानवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा,
जगमग बारे दीयनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा,
जगमग बारे दीयनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा।
कार्तिक महीना के पुजनवा आइल बा-०२
जे भी अंगना में तुलसी के गछिया लगावे,
गंगाजल से पटावे अउरी दीयना देखावे,
रोग दुःख कबहुँ ओ अंगना ना आवे-०२
सच होइ जाला सोचल सपनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा,
जगमग बारे दीयनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा,
जगमग बारे दीयनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा।
और इस भजन का भी अवलोकन करें: नारायण पूछे तुलसी से दिलवा के बात
तुलसी माँ जय जय तुलसी माँ
तुलसी माँ जय जय तुलसी माँ
जय हो !
जे भी धूमे धामे तुलसी के शादी रचावे,
अपना अंगना में भजन या कीर्तन करावे,
तुलसी मैया ओकर जिनगी बनावे-०२
शुभा दिल से कइलअ गुणगणवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा,
जगमग बारे दीयनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा,
जगमग बारे दीयनवा हो,
चलअ सखी करे तुलसी जी के पुजनवा।

