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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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प्यारी सूरत रात रात नै जागूँ रे बाबा नींदडली नहीं आवै रे

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सोने वाले जाग जा संसार मुसाफिर खाना है

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जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी

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दीन बंधू दीनानाथ मोरी सुध लीजिये

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हे विष्णु के अवतार बाबा गंगाराम

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तमाम उम्र तेरा इंतजार हमने किया

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इंतज़ाम कर दिया है तुमने रोज़ी रोटी का

विविध भजन

चल हंसा उस देश समद जहा मोती

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सभा है भरी भगवन

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छैल चतुर रंग रसिया रै भँवरा

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