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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

विविध भजन

लिखन वालिया तू हो के निहाल लिखदे

विविध भजन

मुझको रुलाने वाले मेरे मन

विविध भजन

जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा

विविध भजन

मेरा अवगुण भरा शरीर कहो ना कैसे तारोगे

विविध भजन

दुनिया ना भाए मोहे अब तो बुला ले

विविध भजन

तेरा पता मालूम नहीं

विविध भजन

तू ज़रा कोशिश तो कर

विविध भजन

अमर आत्मा सच्चिदानद मैं हूँ

विविध भजन

अजब तेरी कारीगरी रे करतार

विविध भजन

आया शरण ठोकरें जग की खा के

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