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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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चार चीज़ जब उलटी चल जाएं

sabra tut raha hai b to aa ja bhole
विविध भजन

सब्र टूट रहा है अब तो आ जा भोले

विविध भजन

खड़ा निज नाथ सेवा में

विविध भजन

झोली तो भर गई है नियत भरी नहीं है

विविध भजन

मरुधर में ज्योत जगाय गयो

विविध भजन

लग गयी फकीरा नाल

विविध भजन

प्रभु तेरे चरणों का वंदन

विविध भजन

छोडकर जाना होगा

विविध भजन

जग में प्रेम बड़ा बलधारी

विविध भजन

करनी करे तू काली पापो से न डरे

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