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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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आज के युग में मानवता इंसान छोड़ कर दूर हुए

विविध भजन

कोण किसै नै घराँ बुलावै

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मेरे दाता तेरे दर उते आके

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रूखी मिले चाहे रोटी मुझे

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गंगा जी में डुबकी लगा ले

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हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा

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पीर लख दाता जी मेहर करो

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साडा पीरा ने चल्या कारोबार भगतो

विविध भजन

बच्चे मन के सच्चे

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मैं सिख्खी दा नी छड्डणा राह

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