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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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चल हंसा उस देश समद जहां मोती रे

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कृपा बरसा दईयो मोरी नर्मदा माई

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अपने मां बाप की याद जो मनाते हैं

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कर ले नारायण से प्यार यही दुनिया में सार

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जेहड़ा ताड़ियाँ वजावे ओह्दी लगे हाज़री

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हर सांस में हो सुमिरन तेरा ऐसा बना दो प्रभु जीवन मेरा

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जो विधि करम में लिखे विधाता

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सत्संग दा नजारा दो घड़ियां

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घना दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग

मंत्र एवं स्तोत्रम् | विविध भजन

कुशेश्वर नाथ स्त्रोत्र

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