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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

विविध भजन

मन के बहकावे में ना आ

विविध भजन

जो पराया दर्द अपनाए उसे इंसान कहते हैं

विविध भजन

यहां कोई नहीं अपना दुनिया ही बेगानी है

विविध भजन

तू ढोल बजा लाँगुरिया

विविध भजन

तूने जो कमाया है

विविध भजन

सासु पूछे बहुल से तू क्या लाई पीहर से

विविध भजन

मिटे से मिटती नहीं है कर्म की लकीर रे

विविध भजन

अपने ही कर्मों का दोष

विविध भजन

मैंने मानुष जनम तुझको हीरा दिया

विविध भजन

जीवन की गाड़ी चली जा रही है

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