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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

विविध भजन

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चित्रकूट शुचि धाम है प्रभू का सुहाना

विविध भजन

मैं सब देवा ने छोड़

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प्रार्थना में जो कुछ मांगा

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पाप क्षमा कर जीवन दे दे

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खुल जायेंगी किताबें

विविध भजन

दिल का दरवाजा खुला हुआ

विविध भजन

गरुड़ के रथ पे बैठकर

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प्रभु ख्रीस्त मेरे स्वामी मन के

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हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए

विविध भजन

प्रभु येसु का प्यार

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