बिन पानी के नाव चलाता ऐसा एक खिवैया है

  • Bina Paani Ke Naav Chalata Aisa Ek Khivaiya Hai

बिन पानी के नाव चलाता, ऐसा एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो, जिसका नाम कन्हैया है,
बिन पानी के नाव चलाता, ऐसा एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो, जिसका नाम कन्हैया है।

नाहीं कोई संत है वो, नाहीं कोई साधू है,
छोटा सा एक बालक है, पर उसके हाथ में जादू है-०२
छोटी सी उंगली पर देखो, गिरिवर का धरैया है,
बिन पानी के नाव चलाता, ऐसा एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो, जिसका नाम कन्हैया है।

ऐसे ऐसे काम किये भाई, रख दिया है हिला करके,
ऐसे ऐसे किये करिश्में, बांसुरी को बजा करके-०२
छे गज की साड़ी ना उतरी, ऐसा क्या बढ़इया है,
बिन पानी के नाव चलाता, ऐसा एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो, जिसका नाम कन्हैया है।

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मुझसे पूछा कई भक्तों ने, देखने में कैसा है,
मैंने कहा दिल देकर देखो, दीवानों के जैसा है-०२
दीवानों पर दिल को लुटाये, ऐसा दिल का लुटैया है,
बिन पानी के नाव चलाता, ऐसा एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो, जिसका नाम कन्हैया है।

उसकी भोली सूरत ऐसी, सारा जमाना भूल गए,
चले गए बनवारी, लेकिन वापस आना भूल गए-०२
बंसी बजाकर अपना बनाये, ऐसा बंसी बजैया है,
बिन पानी के नाव चलाता, ऐसा एक खिवैया है,
वृन्दावन में रहता है वो, जिसका नाम कन्हैया है।


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