बिहारी तेरी सूरत को कभी क्या हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे
आजी हा हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे
आजी हा हम भी देखेंगे
कनक में मुकुट माथे पेर
लटकती मोतियो की लाड़िया
श्रवण में झूलते कुंडल
कभी क्या हम भी देखेंगे
आजी हा हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे
वह चिकनी इतरा से भीगी
तेरे मुखड़े पे बलखाती
हटते हो जिसे फिर फिर
वो अलके हम भी देखेंगे
वह सिर पे मोर की पंखी
सजी सलम सितारो से
पवन के संग बलखाती
वो झकी हम भी देखेंगे
कभी क्या हम भी देखेंगे
आजी हा हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे
वह गो रोचन तिलक माथे
रची सुंदर सिर पट्रवाली
झुकी एक और को बेसार
कभी क्या हम भी देखेंगे
कभी क्या हम भी देखेंगे
आजी हा हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे
चरण में नुपूरो वाली
वो रुनझुन करती पायजानिया
वो तेरी चाल मटवारी
कभी क्या हम भी देखेंगे
निमंत्रण देती है जाकर
जो घर घर गोप सुंदरी को
वह रस की धू तली बंसी
कभी क्या हम भी देखेंगे
कभी क्या हम भी देखेंगे
आजी हा हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी मूरत के
जो भीतर है च्छूपी सूरत
जिसे देखा है रसिको ने
कभी क्या हम भी देखेंगे
जिसे देखा है सॅंटो ने
कभी क्या हम भी देखेंगे
जिसे देखा है भक्त ने
कभी क्या हम भी देखेंगे
बिहारी तेरी सूरत को
कभी क्या हम भी देखेंगे

