भोलेनाथ निराला है

  • Bholenath Nirala Hai

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं !
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं !
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं !
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं !

हर कंकड़ में बसे हैं शंकर; हर कण में विश्वास है,
बाबा की चौखट पर होती, पूरी सबकी आस है,
हर कंकड़ में बसे हैं शंकर; हर कण में विश्वास है,
बाबा की चौखट पर होती, पूरी सबकी आस है,
कुबरेश्वर की महिमा ने, भक्तों को तारा है,
सिहोर में बैठा मेरा भोलेनाथ निराला है-०४

भुला भटका जो भी आये, उसको राह दिखाते हैं,
पूज्य गुरूजी अपने मुख से, शिव शंकर हीं गाते है,
भुला भटका जो भी आये, उसको राह दिखाते हैं,
पूज्य गुरूजी अपने मुख से, शिव शंकर हीं गाते है
ऋषि मुनी भी हरदम जपते, जिसकी माला है,
सिहोर में बैठा मेरा भोलेनाथ निराला है-०४

अभिमंत्रित रुद्राक्ष यहाँ का, हर दुःख को हर लेता है,
रिद्धि सिद्धि का दाता वो, भंडारा भर देता है,
अभिमंत्रित रुद्राक्ष यहाँ का, हर दुःख को हर लेता है,
रिद्धि सिद्धि का दाता वो, भंडारा भर देता है,
वो है दानी, सबकी झोली भरने वाला है,
सिहोर में बैठा मेरा भोलेनाथ निराला है-०४

इस भजन का भी रसपान करें: चलो भोले के द्वार

कुबरेश्वर के धाम में, जो भी अपना शीश झुकाता है,
एक लोटा केदार शिला पे, आकर नीर चढ़ाता है,
उसको मेरे भोलेनाथ ने सदा संभाला है,
सिहोर में बैठा मेरा भोलेनाथ निराला है-०४
एक लोटा जल से करता, जो शिवलिंग का अभिषेक है,
पूरी होती हर इच्छा, ऐसा कहते गुरुदेव हैं,
एक लोटा जल से करता, जो शिवलिंग का अभिषेक है,
पूरी होती हर इच्छा, ऐसा कहते गुरुदेव हैं,
एक लोटा जल से करता, जो शिवलिंग का अभिषेक है,
पूरी होती हर इच्छा, ऐसा कहते गुरुदेव हैं।


मिलते-जुलते भजन...