भोले तेरे दर पे आया हूँ
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ,
कृपा करो हे डमरू वाले, सबकुछ त्याग के आया हूँ,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ।
सोमनाथ और काशी विश्वनाथ, महाकाल का धाम,
कण-कण में गुंजायमान है, शंभू तेरा नाम,
भस्म लगाए बैठे हो तुम, डमरू की हर तान,
तेरी कृपा से बनता है, बिगड़ा हर एक काम,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ,
कैलाशपति शिव शंभू हमारे, भक्ति के आधार,
सच्चे मन से जो भी ध्याये, करते दुखों का पार,
ह्रदय कमल में शंभू बसे, आँखों में है रूप,
तेरी भक्ति की छाया में, लगती मीठी धुप,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ।
गंगा जी की पावन धारा, उज्जैन की माटी,
मन को शांति देती है, महाकल की घाटी,
कलियुग का ये कठिन जमाना, जब भी भटकता है,
भोले बाबा नाम का सहारा हीं मिलता है ,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ,
मान और सम्मान की इच्छा, अब इस मन से छूट गयी,
जब से शिव भक्ति की मस्ती, इस पागल को लूट गयी,
छोड़ के दुनिया की चालाकी, भोला भाव जगाया है,
शरण पड़ा हूँ बाबा, थारे दर पे आया हूँ,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ।
अमरनाथ की गुफाओं में, अमर कथा सुनाते,
सच्चे मन से जो भी ध्याये, सब संकट मिट जाते,
विष पीकर नीलकंठ कहाये, जगत के तुम आधार,
तेरी कृपा से होता है, सबका बेड़ा पार,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ।
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घंटा और घड़ियाल की ध्वनि, मन का मैल मिटाती है,
महादेव की आरती, सोयी किस्मत जगाती है,
शिवालय के द्वार पे आकर जब, हर हर शंभू चिल्लाऊंगी,
भक्ति रस की मस्ती में, मैं झूम-झूम गिर जाउंगी,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ।
चिंताओं के इस सागर में, जब दम घुटने लगता है,
ॐ नमः शिवाय का मंत्र हीं, विपदा को पल में हरता है,
और तुम्हारी एक कृपा दृष्टि, जब सिर पर फिर जाती है,
हारी हुई बाजी भी पल में, जीती हुई बन जाती है,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ,
तीनो लोक के स्वामी शंभू, भावों के हैं भूखे,
प्रेम बिना सब ठाठ बाट है, फीके फीके रूखे,
जिसका कोई ना दुनिया में, उसको तुमने संभाला,
दीन दुखियों का रक्षक है, मेरा बम भोला डमरू वाला,
भोले तेरे दर पे आया हूँ, झोली अपनी फैलाया हूँ,
आँखे मूंदकर जब भी देखूं, दिव्य रूप दिख जाए।

