भटकता मन है मोहन
भटकता मन है मोहन, अब तो राह दिखाओ-०२
चरणों में दे दो आसरे, मुझे पास बुलाओ,
भटकता मन है मोहन, अब तो राह दिखाओ-०२
मन मेरा है बंजारा, तू हीं है एक किनारा,
भूल मेरी माफ़, बस तेरा नाम सहारा,
कृपा की रेख खींचो, अब तो द्वार दिखाओ,
भटकता मन है मोहन, अब तो राह दिखाओ-०२
और इस भजन से भी आनंदित हों: जो पास तेरे वही है तेरा
अँधेरे दिल के छाये, नैनन में नीर समाए,
संघर्षों से टुटा मन, अब तुझसे आस लगाए,
छु ले तो विश्वास से, जीवन रूप संवारो,
भटकता मन है मोहन, अब तो राह दिखाओ-०२
मुरली की वो मधुरता, है जैसे प्राण हमारा,
तेरे बिना अधूरी लगे, हर एक द्वारा,
रस बरसे प्रेम तेरा, मन को रंग लगाओ,
भटकता मन है मोहन, अब तो राह दिखाओ-०२


