बरस रही प्रभु की कृपा अपार

  • Baras Rahi Prabhu Ki Kripa Apar

प्रभु सभी में सम भाव बिराजे,
प्रभु सब में सम भाव बिराजे-०२
सबका करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०४

कान मिले सत्संग सुनने को-०२
नयन मिले दर्शन करने को-०२
हाथ मिले सेवा कर के नर मानव जन्म सुधार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०२
प्रभु सभी में सम भाव बिराजे,
सबका करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०३

जीभ मिली हरी नाम जपन को-०२
बुद्धि मिली है श्रवण मनन को-०२
मनन करत नित ध्यान करो, हो जाओ भव से पार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०२
प्रभु सब में सम भाव बिराजे,
सबका करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०३

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धन यौवन का मान ना कीजे-०२
मानव जन्म सफल कर लीजे-०२
राम नाम का सुमिरन करके, हर में हरी निहार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०२
प्रभु सभी में सम भाव बिराजे,
सबका करे उद्धार,
बरस रही हरी की कृपा अपार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार,
हो बरस रही प्रभु कृपा अपार।

सत्संग सेवा सुमिरन करले-०२
श्रद्धा भक्ति से झोली भरले-०२
राम कथा की गंगा नहा ले भिक्षु करे पुकार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०२
प्रभु सब में सम भाव बिराजे,
सबका करे उद्धार,
बरस रही प्रभु की कृपा अपार-०२
हो बरस रही प्रभु कृपा अपार।


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