बालाजी में सज़ा है दरबार

  • Balaji Mein Saja Hai Darbar

बालाजी में सज़ा है दरबार
सखी रे चल दर पे चले।।

हाथो में लेके पूजा की तली
लेके ध्वजा बाला लाल रंग वाली।।

सच्चे मान से लगाए जैकार
सखी रे चल दर पे चले।।

बालाजी में सज़ा है दरबार
सखी रे चल दर पे चले।।

नाचते गाते दर तेरे आए
सवा मानी तुझको भोग लगाए।।

और शीश नवाए हर वार
सखी रे चल दर पे चले।।

बालाजी में सज़ा है दरबार
सखी रे चल दर पे चले।।

भूत और प्रेटो की बधाई कटती
उपरी हवओ को बालाए हटती
मेरे बालाजी सच्चे सरकार
सखी रे चल दर पे चले।।

बालाजी में सज़ा है दरबार
सखी रे चल दर पे चले।।

बालाजी तुम्हारी महिमा है न्यारी
चंदन को है लगती प्यारी।।

तोहे तिलक लगाए हरबार
सखी रे चल दर पे चले।।

बालाजी में सज़ा है दरबार
सखी रे चल दर पे चले।।

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