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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

माँ दुर्गा भजन

तेरे पावन मां नवरात्रों में ज्योत तेरी जगाये हुए हैं

माँ दुर्गा भजन

पर्वत से उतर कर मा मेरे घर आ जाना

माँ दुर्गा भजन

ठोकर खाता फिर रहा माँ मुझे बेटा कह के पुकार

माँ दुर्गा भजन

हो के शेर सवार दर्शन दे माता

माँ दुर्गा भजन

चल चलिये दरबार मैया दी चल चलिये

माँ दुर्गा भजन

मांगने को हाथ भी नहीं है बंदा गरीब है

माँ दुर्गा भजन

चुनरी उढ़ाऊ तेरे मेहँदी लगाऊ

माँ दुर्गा भजन

कालीए नी कलकत्ते वालीए माता

माँ दुर्गा भजन

बैठी सजाके दरबार चामुंडा महारानी

माँ दुर्गा भजन

नदी किनारे नारियल है

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