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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

तूने ओ बाबोसा कैसा जादू किया

विविध भजन

चित्रकूट शुचि धाम है प्रभू का सुहाना

विविध भजन

मैं सब देवा ने छोड़

विविध भजन

प्रार्थना में जो कुछ मांगा

विविध भजन

पाप क्षमा कर जीवन दे दे

विविध भजन

खुल जायेंगी किताबें

विविध भजन

दिल का दरवाजा खुला हुआ

विविध भजन

गरुड़ के रथ पे बैठकर

विविध भजन

प्रभु ख्रीस्त मेरे स्वामी मन के

विविध भजन

हे पापी संसार पिता पे बेटी ना राखी जाए

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