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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

सजी रहे राहे उनकी फूलो से सदा

विविध भजन

केहड़े घर जावां एहो खड़ा मैं

विविध भजन

प्यारा बाबोसा ने खम्मा घणी

विविध भजन

चार दिनों की प्रीत जगत में

विविध भजन

चाँद चमके सदा रौशनी के लिए

विविध भजन

माँ तो है माँ माँ तो है माँ

विविध भजन

सपनो में जो आया है

विविध भजन

जानो पड़सी रे पंछी

विविध भजन

देवता भी स्वार्थी थे दौड़े अमृत के लिए

विविध भजन

जो मात पिता से जोड़े प्रीत

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