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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

एक प्यार का बंधन है

विविध भजन

मृग तृष्णा है दुनिया दारी कब तक भागेगा प्राणी

विविध भजन

ॐ है जीवन हमारा

विविध भजन

सत्ये वचन क्यों छोड़ दियां

विविध भजन

जय जय गऊ माता

विविध भजन

उठ जाग मुसाफिर भोर भई

विविध भजन

जो कर्म कर रहे हो वहाँ सब हिसाब है

विविध भजन

मेरे दाता के दरबार में है सब का खाता

विविध भजन

कुसंगत मे जाये मत ना

विविध भजन

जबान जैसी मीठी जगत में जबान जैसी खारी क्या

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