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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

चुनरी बनायी मैया पाई पाई जोड़ के

विविध भजन

चलो मन जाए घर अपने

विविध भजन

तू जय बाबे री बोल बाबो भली करे

विविध भजन

जरा तो इतना बता दो भगवन

विविध भजन

हर बात को तुम भूलो भले माँ बाप मत भूलना

विविध भजन

पाहता पाहता पहाटेची झाली सांज

विविध भजन

मैया जी मेरी बेटी चली ससुराल

विविध भजन

जे तू फड़दा ना साडी बाहँ असां रुल जाना सी

विविध भजन

जो है वो भुलाने के काबिल नहीं है

विविध भजन

क्यों आ के रो रहा है गोविन्द की गली में

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