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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

पापा जल्दी आजा ना

विविध भजन

अपने सपने तोड़ के पापा

विविध भजन

ना जरूत उन्हें पूजा और जाप की

विविध भजन

दुःख भी मानव की संपत्ति

विविध भजन

आज के युग में मानवता इंसान छोड़ कर दूर हुए

विविध भजन

कोण किसै नै घराँ बुलावै

विविध भजन

मेरे दाता तेरे दर उते आके

विविध भजन

रूखी मिले चाहे रोटी मुझे

विविध भजन

गंगा जी में डुबकी लगा ले

विविध भजन

हे मनमोहनियाँ लख दाता साहनु कदो भुलावे गा

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