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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

विविध भजन

यु कई फेरे माला ने रे भाया

विविध भजन

मदिरा पी कर के नाचे ये माहरो भेरू

विविध भजन

मैं रोनी आ तेरे करके

विविध भजन

जांड्डा वाला पुत्त वंद दा

विविध भजन

अमृत वेला जिन्दे नि उठ के

विविध भजन

सरवन जैसा नही रे सेवक

विविध भजन

बेटी तो वो चिड़िया जिसे

विविध भजन

मानव किसका अभिमान करे

विविध भजन

जे चले हो सरहन्द नूं

विविध भजन

इतरा ना इतना बंदे दो दिन की जिन्दगी

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