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Author: Bhajan Pravah
विविध भजन
मन मुश्काराये भगति से जियराइ जुड़ाये हो
विविध भजन
मैं हर जन्म तेरी बेहना बनु
विविध भजन
श्री कुबेर जी है भंडार भरते ध्यान हिरदये में जो इनका धरते
विविध भजन
मेरे बाबा मोहन राम हो राम
विविध भजन
गुरूवर टेकचंद जी जैसा जग में सेठ कोई नी
विविध भजन
एह हवा तू कहा जा रही है
विविध भजन
सदा सुहागन नारी का ये व्रत है बड़ा महान
विविध भजन
नारी अति महान जगत में
विविध भजन
करवे की रात है
विविध भजन
चार वेद के शास्त्र देख लो
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