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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

रानी सती दादी भजन

थारी चुनड दादी जी लेहर लेहर लहराई रही

रानी सती दादी भजन

धरती सतिया री

रानी सती दादी भजन

दादी मोर बोले

रानी सती दादी भजन

म्हारे पग पग पे दादी खड़ी

रानी सती दादी भजन

मेरे सिरहाने खड़ी है दादी सर पे हाथ फिराती है

रानी सती दादी भजन

लाल जवा के फुला सु आज बनायो हार

रानी सती दादी भजन

भगतो का चीर के कलेजा देख ले

रानी सती दादी भजन

सेवा में दादी थारी मैं तो रम जाऊ माँ

रानी सती दादी भजन

नन्हा सा फूल हु मैं चरणों की धुल हु मैं

रानी सती दादी भजन

तेरे होते क्यों दादी मैं हार जाती हु

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