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भजन प्रवाह – Bhajan Pravah
भजन प्रवाह – Bhajan Pravah

Author: Bhajan Pravah

माँ दुर्गा भजन

दे के चरना दे विच था तू लाइयाँ मौजा ही मौजा

माँ दुर्गा भजन

मेरी बिगड़ी बनाने को मेरी जगदम्बे आएगी

माँ दुर्गा भजन

आई है जागे वाली रात वे मैं ता झूम झूम नाचना

माँ दुर्गा भजन

साडे घर जगराता माँ दा लख लख शुक्र मनाइये

माँ दुर्गा भजन

खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार मेरी माँ

माँ दुर्गा भजन

आया बुलावा तेरा जगदाम्बे फूली ना समाई

माँ दुर्गा भजन

माँ के जैसा जमाने में दानी नही

माँ दुर्गा भजन

दिलवाली पालकी में तुम्हे माँ बिठाना है

माँ दुर्गा भजन

रूप माँ तेरा बड़ा निराला गल दे विच सिर मुंडन माला

माँ दुर्गा भजन

तुम अगर द्वार मैया आते रहो काम जो भी हैं बिगड़े सुधर जाएंगे

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