आनंद मंगलाचार सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार
आनंद मंगलाचार सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार
निर्गुण का गुण कसा हम गांवा रे
गुण को छे अंत नि पार
सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार
ज्ञान गंगा की निर्मल धारा
सत्संग होय दिन रात
सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार
होत भण्डारा नित का नया रे
पांवा छे महा परसाद
सिंगाजी घर आनंद मंगलाचार

