आओ मनमोहन आओ नंद कंदन
आओ मनमोहन आओ नंद कंदन
गोपी जन प्राण धन राधा और चंदना
आओ मनमोहन आओ नंद कंदन।।
जैसे तुम गणिका के अवगुण जीने ना नाथ
कैसे तुम भीलनी के झूठे बैर खाये हो।।
कैसे तुम द्वारिका में द्रौपदी की तेरी सुनी
कैसे तुम गजकज नंगे पाव ध्यान हो
कैसे तुम सुदामाजी के चिन में दरिद्र हरे
कैसे तुम उपसेन बैंड से छुड़ाये हो
कैसे तुम भारत में विश्व तो है प्राण राखो
कैसे वासुदेवकी के बंधन छुड़ाए हो।।
करुणा निदान श्याम मेरी फेर मोंडे कहा
अशरण शरण श्याम सुर मन भये हो
आओ मनमोहन आओ मनमोहना
तेरे आगन सांवरे आउ तोहे पुकार
उर मैं लू चाव तो मैं फूलन के हार
मैं को फूलन को हार मोर को पंख लगाडू तेरे हा
लकड़ी पट बंद कर मुक्त सजदू तेरे हा
आओ तोहे पुकार प्यारे आओ तोहे पुकार।।
आओ मनमोहन आओ नंद कंदन
गोपी जन प्राण धन राधा और चंदना
आओ मनमोहन आओ नंद कंदन।।

