आओ गणपति मेरे अंगना में मैं झूला तुम्हें झूलूंगी
आओ गणपति मेरे आने में
मैं झूला तुम्हें झूलूंगी
गणपति मेरे अंगना में।।
गायिका: तृप्ति शाक्य
आओ गणपति मेरे आने में
मैं झूला तुम्हें झूलूंगी।।
तुम खाते हो मोदक मेवा
मैं उसका भोग लगाऊंगी।।
आओ गणपति मेरे आने में
मैं झूला तुम्हें झूलूंगी।।
तुम बालक रूप में आ जाना
संग रिद्धि सिद्धि ले आजना।।
संग शुभ और लाभ और को ले आना
मैं सिंहासन पे बिठौंगी।।
आओ गणपति मेरे आने में
मैं झूला तुम्हें झूलूंगी
मैने पीतांबर सिलवाया है
हीरे मोती लगवाया है
गले वैजयंती मुकुट तुम्हें
मैं हाथो से पहाऊंगी
आओ गणपति मेरे आने में
मैं झूला तुम्हें झूलूंगी
आओ गणपति मेरे आने में
तुम दुख हर सुख करता हो
भक्तो के भाग्य सावर्त हो।।
मैं सेवक हूं तुम स्वामी हो
चारनो में शीश झुकाउंगी
तुम गौरा जी के प्यार हो
शिव जी के दुलारे हो
गिरी भव से पार उतर जाउंगी
मैं महिमा इनकी गाउंगी ।।
आओ गणपति मेरे आने में
मैं झूला तुम्हें झूलूंगी
आओ गणपति मेरे आने में।।
देवा आला रे
आला रे हम सब का राजा
देवा आला रे
आला रे गणपति हम सब का राजा।।

