हर एक दिल मे हर एक कन मे
हर एक दिल मे हर एक कन मे
तुम ही तुम तो बस्ते हो।।
हर एक दिल मे हर एक कन मे
तुम ही तुम तो बस्ते हो
वायु अग्नि जल पृथ्वी नभ
सब में तुम ही रहते हो।।
विश्वा झलकता है पूरा
जब हो तेरा दर्शन
तुम्ही हो निर्माण विश्वा का
तुम्ही हो धड़कन
जय गजानन जय गजानन।।
राजेश्वर तुम विश्वा विनायक
जय गजानन जय गजानन।।
मानवता हो कोई कला हो
या गुण हो या निरगुन हो
जिगयसा हो प्रशण भी तुम हो
सुलझन भी तुम हो
बुद्धि के दाता हो तुम
मॅन का हो तुम दर्पण
तुम हो मूलाधार हो विश्वा के
शिव पार्वती नंदन
हर एक दिल मे हर एक कन मे
तुम ही तुम तो बस्ते हो
वायु अग्नि जल प्रथवी नभ
सब में तुम ही रहते हो
विश्वा झलकता है पूरा
जब हो तेरा दर्शन
तुम्ही हो निर्माण विश्वा का
तुम्ही हो धड़कन
जय गजानन जय गजानन।।
राजेश्वर तुम विश्वा विनायक
जय गजानन जय गजानन।।
आदि अंत हो तुम दिगंत हो
तुम अनंत हो विश्वात्मा
ध्यता तुम हो ध्येय भी तुम हो
ध्यान भी तुम हो परमात्मा।।
