दिवाली का सबसे सुन्दर भजन
जिसके आने से अवध की हर गली में बहार आये,
जिसके चरणों की आहट से चौदह वर्ष बाद दिवाली आये !
जिसने पत्थर को भी छूकर, जीवन का वरदान दिया,
जिसने शरण में आये हर जन को, प्रेम से सम्मान दिया,
जिसकी महिमा गाये धरती, जिसका गाये आसमान,
ऐसे करुणा के सागर को, बारम्बार प्रणाम,
राम बिना सूना मन का आँगन, राम बिना सूना धाम,
मेरी हर धड़कन में बसते, सीता संग श्री राम,
श्री राम जय राम, जय जय राम-०२
राज तिलक की बेला आयी, सजने लगा दरबार,
पिता के वचन निभाने खातिर, त्याग दिया संसार,
राजमुकुट की जगह पहनकर, वनवासी का बेष,
धर्म बचाने चल पड़े प्रभु, लेकर सत्य सन्देश,
राम बिना सूना मन का आँगन, राम बिना सूना धाम,
मेरी हर धड़कन में बसते, सीता संग श्री राम,
सबरी ने राह निहारी थी, आँखों में विश्वास,
प्रेम भरी बेरों को खाकर, रख ली उसकी आस,
केवट ने जब चरण पखारे, धन्य हुआ परिवार,
भक्त के प्रेम के आगे झुकते, मेरे प्रभु करतार,
श्री राम जय राम, जय जय राम-०२
और इस भजन को भी देखें: मेरे घर राम आए हैं
सीता के खोज में निकले, वन-वन किया विहार,
हनुमत के जैसे भक्त को पाकर, मिला अटूट सहारा,
सागर पर सेतु बनाया, लंका तक पथ खोला,
अधर्म के अभिमान को हरकर, सत्य का दीप जलाया,
राम बिना सूना मन का आँगन, राम बिना सूना धाम,
मेरी हर धड़कन में बसते, सीता संग श्री राम,
चौदह वर्ष बाद अवध में, लौटी खुशियों की रात,
भरत मिले अपने भैया से, भर आई सबकी आँख,
माँ कौशल्या ने ह्रदय लगाया, सीता ने शीश झुकाया,
लक्ष्मण संग रघुवर को पाकर, अवध ने पर्व मनाया,
दीप जले हर द्वार पे देखो, गूंजा जय श्री राम,
आज अयोध्या धन्य हुई है, लौटे उसके प्राण,
मेरे मन में प्रेम जगा दो, ऐसा निर्मल भाव,
किसी दुखी की पीर समझ लूँ, मुझमे हो यह चाव,
तेरी राह में शीश झुकाऊं, तेरा नाम सम्भालूं,
जब भी जीवन डगमग हो प्रभु, तेरा हाथ तो पर्व मनाया
दीप जले हर द्वार पे देखो, गूंजा जय श्री राम,
आज अयोध्या धन्य हुई है, लौटे उसके प्राण,
मेरे मन में प्रेम जगा दो, ऐसा निर्मल भाव,
किसी दुखी की पीर समझ लूँ, मुझमे हो यह चाव,
तेरी राह में शीश झुकाऊं, तेरा नाम सम्भालूं,
जब भी जीवन डगमग हो प्रभु, तेरा हाथ पुकारूँ।

