विष्णुप्रिया हे चराचर स्वामिनी
विष्णुप्रिया हे चराचर स्वामिनी,
माता सुरेश्वरि काज संवारो-०२
तेरी कृपा बिन सूना है जीवन,
सेवक के घर आज पधारो-०२
नित्य जपूँ तेरे नाम की माला को, मेरे दुखों को कृपा कर तारो,
सिंधुसुता दुर्भाग्य विनाशिनी, माँ लक्ष्मी मेरी ओर निहारो-०२
पूज्य है कन्या तुम्हारी दया से हीं,
स्वर्ग में है सुख वैभव छाया-०२
आनंद में रहते सब देवता,
है ये अपार तुम्हारी हीं माया-०२
दिव्य प्रभाव से माँ तुमने, सब लोकों को है अति भव्य बनाया,
ब्रह्मा ने तो बस सृष्टि रचा, पर सृष्टि को माँ तुमने है सजाया-०२
अष्ट स्वरुप को धारके माँ,
तुमने निज भक्तों का कष्ट मिटाया-०२
गज लक्ष्मी बनके कीर्ति को दे,
बिन स्वार्थ,जनों का है मान बढ़ाया-०२
झोपड़ियों को किया महलों सा, है कण-कण में तेरा तेज समाया,
जो शरणागत तेरा हुआ, तिहुँ लोकों ने माँ उसका यश गाया-०२
तुम बिन यज्ञ ना पूरन होते हैं,
कार्य नहीं शुभ कोई हो पाते-०२
तुम बिन मानव हार के साहस,
होकर व्याकुल अश्रु बहाते-०२
ज्ञानी गुनी बलवान यति सब, तेरे बिना नित हैं अकुलाते.
माँ लक्ष्मी हमपर रहना खुश, हम तो तेरा नित ध्यान लगाते-०२
हे कमला करुणा की स्वरूपिणी,
है महिमा तुम्हरी अति न्यारी-०२
रंक को राजा बनाती हो माँ तुम,
तेरा भण्डार खुला बड़ा भारी-०२
दानव भी और देवता भी, तेरे मंदिर में एक साथ पुजारी,
हमपे भी दृष्टि करो भयमोचिनी, हम तो हैं तेरी दया के भिखारी-०२
शीश सुशोभित दिव्य मुकुट और,
रूप चतुर्भुज जन मन भावे-०२
कानन कुण्डल हार गले,
मंद मंद हंसी माँ अतीव सुहावे-०२
पैजनी पाँव में बाजे छना छन, अद्भुत छवि रति काम लजावे,
आये ना पास में कष्ट कभी, जो ये सुन्दर शोभा ह्रदय में बसावे-०२
और इस भजन को भी देखें: मेरे घर में करो बसेरा लक्ष्मी माँ
जय जय माँ भार्गवी भुवनेश्वरी,
जय जय वैकुण्ठ निवासिनी मैया-०२
जय यश कृति वैभव दायिनी,
पंकज आसन वासिनी मैया-०२
पाप विनाशिनी पुण्य प्रकाशिनि, अघहारिणी अविनाशिनी मैया,
जय लक्ष्मी शुभ मंगल कारिणी, दुःख दारिद्र नाशिनी मैया-०२




