हे जगपालक श्री नारायण
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
क्षीर सागर में शेष सैया पर तुम्हीं श्यन रचाते हो,
नाभि कमल से ब्रह्मा उपजे, तुम्हीं जगत चलाते हो,
शंख चक्र गदा पद्म धारी, महिमा तुम्हारी है अति न्यारी,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण।
जब-जब धर्म पे संकट आया, तुमने हीं अवतार लिया,
नरसिंह बनकर हिरणकश्यप का, तुमने हीं संहार किया,
मत्स्य कूर्म वराह रूप धर, डूबती धरती को पार किया,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण।
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गरुड़ सवारी करनेवाले, रमापति बैकुंठ निवासी,
शरण तुम्हारे जो भी आता, काटते जन्म-मरण की फांसी,
हम दीनों की अर्ज यही है, राखो अपने श्री चरणन,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
हे जगपालक हे जगवंदन, नमन तुम्हें श्री नारायण,
सृष्टि के आधार तुम्हीं हो, भव भंजन श्री लक्ष्मी नारायण,
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय,
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय,
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा !

