मैं नारायण घर ले आई
मैं नारायण घर ले आई, अब मुझे किसी की कमी नहीं-०२
मैं पारस घर में ले आई, अब धन दौलत की कमी नहीं-०२
हो अब धन दौलत की कमी नहीं।
माया का सागर गहरा है-०२
और मुझे तैरना आता नहीं-०२
नैया का नाम कन्हैया है, डूबे तो कोई फिक्र नहीं-०२
मैं नारायण घर ले आई, अब मुझे किसी की कमी नहीं-०२
हो अब धन दौलत की कमी नहीं।
घनघोर अँधेरा इस जग में-०२
मैं बुझा दीप इस बाती का-०२
सूरज को मनाकर ले आई, अब अंधियारे की फिक्र नहीं-०२
मैं नारायण घर ले आई, अब मुझे किसी की कमी नहीं-०२
हो अब धन दौलत की कमी नहीं।
खिड़की दरवाजे खोल दिए-०२
सारा सामान निलाम हुआ-०२
आना जाना आसान हुआ, ताले चाभी की फिक्र नहीं-०२
मैं नारायण घर ले आई, अब मुझे किसी की कमी नहीं-०२
हो अब धन दौलत की कमी नहीं।
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मंदिर घर से था दूर बहुत-०२
पैरों में मेरे प्राण नहीं-०२
जब घर में प्रभु जी आ बैठे, तीरथ जाने की फिक्र नहीं-०२
मैं नारायण घर ले आई, अब मुझे किसी की कमी नहीं-०२
हो अब धन दौलत की कमी नहीं,
अब धन दौलत की कमी नहीं,
हो अब धन दौलत की कमी नहीं।
