अनंत चतुर्दशी आरती
बोलिये अनंत भगवान की जय !
प्रेम से बोलिये विष्णु भगवान की जय !
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे,
भक्तों के संकट हरते, दिनों के कष्ट हरे,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे-०२
शेषैया पर सोहे मष्तक मुकुट धरे,
पीताम्बर तन पर सोहे कर में शंखचक्र धरे,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे-०२
लक्ष्मी संग विराजे, करते मंगल काम,
जो श्रद्धा से ध्यावे, पूर्ण हो उनके काम,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे,
चौदह लोकों के स्वामी आप अनंत कहाये,
जो जन आपकी पूजा करे सुख सम्पति वो पाये,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे-०२
अनंत सूत्र धारण करे श्रद्धा मन में लाये,
हरी की कृपा से उनके संकट दूर हो जाये,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे-०२
दुःख दरिद्र हर लो, करुणा दृष्टि करो,
भक्ति और सद्बुद्धि देकर जीवन सफल करो,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे-०२
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शरण पड़े हैं प्रभु जी रखिये अपनी लाज,
आप बिना इस जग में कौन रखे मेरी लाज,
ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे-०२
श्री अनंत भगवान तामय !
