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विदा की घड़ी करीब है

  • Vida Ki Ghadi Karib Hai

कल तक जहाँ तेरी हंसी थी, आज वहीं ख़ामोशी होगी,
जिस आँगन में तुम बैठे थे, वो चौखट फिर सुनी होगी,
दीप अभी भी जलता बप्पा, फूल अभी भी महक रहे,
विदा की घड़ी करीब है, लेकिन कदम हमारे ठहर रहे,
ना जाओ छोड़कर अपना घर, गणपति तेरे बिना ना रह पाएंगे अब हम,
कैसे करें बप्पा तुमको विदा, आँखे हुईं हैं आज ये नम,
ना जाओ छोड़कर अपना घर, थोड़ी देर और ठहर जाओ तुम,
दिल ये कहता बार-बार बप्पा, अभी ना जाओ तुम।

जिस दिन तुम घर आये बप्पा, खुशियों ने दस्तक दी थी,
तेरे आने से इस आँगन की, हर एक सुबह नयी थी,
सुबह तुम्हारी आरती करके, शाम तुम्हारे दीप जलाये,
मोदक फूल चढ़ाकर हमने, कितने प्यारे गीत सुनाये,
अब वो आसन खाली होगा, जहाँ तुम्हारा रूप सजा,
कैंसे देखें सूना आँगन, जहाँ था बप्पा मेरा बसा,
मन समझाए जाना होगा, दिल कहता है कुछ देर रुको,
आज विदाई मत लो बप्पा, बस एक दिन और रुको,
ना जाओ छोड़कर अपना घर, गणपति तेरे बिना ना रह पाएंगे अब हम,
कैसे करें बप्पा तुमको विदा, आँखे हुईं हैं आज ये नम,
ना जाओ छोड़कर अपना घर, थोड़ी देर और ठहर जाओ तुम,
इतना प्यार लगा है तुमसे, कैसे कह दें जाओ तुम।

आरती की थाली सजी है, पर हाथ आज क्यों काँप रहे,
फूल तुम्हारे चरणों में है, पर नैन हमारे भींग रहे,
माँ ने जो मोदक बनाये थे, उनमें भी आज याद रहेगी,
तेरे जाने के बाद ये चौखट, हर आहट पर तुझे ढूंढेगी,
घर का हर एक कोना बप्पा, तेरी याद दिलाएगा,
जहाँ जहाँ तेरे चरण पड़े थे, मन वहीं शीश झुकायेगा,
कोई भूल हुई हो हमसे, अपने बच्चे समझ भुलाना,
पूजा में कुछ कमी रही हो, बप्पा उसको मन ना लगाना,
हमने जितना प्रेम दिया है, उससे ज्यादा तुमसे पाया,
कुछ दिनों के इस मिलन ने, जीवन भर का रिश्ता बनाया
ना जाओ छोड़कर अपना घर बप्पा, तेरे बिना ना रह पाएंगे अब हम,
आज तुम्हें विदा करते हैं, पर दिल से ना कर पाएंगे हम,
ना जाओ छोड़कर अपना घर, एक बार पलट कर देखो तुम,
आँखों में जो बात रुकी है, बिन बोले हीं समझो तु।

और इस भजनं को भी देखें : हे गणपति तेरी आरती गाऊं

चौखट से जब बाहर निकले, घर ने जैसे तुम्हें पुकारा,
फूल बरसते राहों में, दिल ने नाम तुम्हारा पुकारा,
ढ़ोल बजे पर दिल है भारी, मुख पर फिर भी जयकारा,
आंसू भी है श्रद्धा भी है, साथ चले गणराज हमारा,
हर कदम पर मन ये बोले, दूर कहाँ तुम जाओगे,
रूप तुम्हारा विदा हो लेकिन, दिल में सदा समाओगे ,
आज विदाई है गणराया, ये रिश्ता नहीं समाप्त हुआ,
फिर मिलने की आस ने बप्पा, नम आँखों को थाम लिया,
अगली बार जब तुम आओगे, फिर आँगन हम सजायेंगे,
जिस चौखट से आज विदा हो, वहीं तुम्हें फिर लाएंगे,
आज अगर जाओगे तो वादा करना, जल्दी लौट के आओगे,
अगली बार फिर इसी घर में अपना आस सजाओगे,
हम राह तुम्हारी देखेंगे, फिर फूलों से घर भर देंगे,
तुम बस जल्दी आना बप्पा, हम फिर से उत्सव कर लेंग।
बोलो गणपति बप्पा की जय !
गौरी नंदन बप्पा की जय !
विघ्नहर्ता गणराज की जय !


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